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#मनुस्मृती मनुस्मृति कहती है, विभिन्न संस्कारों से जीव के माता-पिता से लगे दोष दूर हो जाते हैं अर्थात जैसे कोई रिक्शा चलाने वाला प्रतिदिन आकर अपनी अर्धांगिनी को पीटता है और उनकी एक बेटी बड़ी होकर पायलट बनती है तो उसे उसके कार्यस्थल पर उसके पिता क्या करते थे उनका क्या व्यवहार था इससे नहीं जाना जाएगा बल्कि उस लड़की के अंदर कितनी कैपेबिलिटी है कैसे वह अपने वर्क प्रेशर को हैंडल करती है उस से जाना जाएगा, लेकिन यदि वह द्विज नहीं होती उसके पढ़ने (पढ़ाई भी एक संस्कार है जो होने पर आपको द्विज की उपाधि मिलती है) और दूसरे कार्य पूर्ण नहीं होते स्कूल में उसे जाने का अवसर ही नहीं मिलता तो हो सकता था वह इसी रेलवे स्टेशन पर कबाड़ इकट्ठा करती नजर आती, इस प्रकार से उस लड़की के पास उसके माता-पिता द्वारा जो पहचान निर्मित की गई समाज में वह भी साथ ही आती, हो सकता है तब उसके वैवाहिक जीवन का प्रारंभ किसी ड्राइवर के हेल्पर के साथ हुआ हो जबकि पायलट होने पर किसी आईएएस के साथ वह अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करें, _ मनुस्मृति_2_27 #💥भाजपा vs काँग्रेस #👨‍🔧UPSC/MPSC #👆तयारी स्पर्धा_परीक्षेची #🙏 बाबांची शिकवण
मनुस्मृती - गार्भैरहोमैर्जातकर्म चौडमौञ्जीनिबन्धनैः 4 बैजिकं गार्भिकं चैनो द्विजानां अपमृज्यते 1 गर्भसंस्कार , जातकर्म , मुण्डन , उपनयन इन संस्कारों जाते हैं। से द्विजों के मातृ -पितृ -जन्य दोष  51 -मनुस्मृति , २/ २७ गार्भैरहोमैर्जातकर्म चौडमौञ्जीनिबन्धनैः 4 बैजिकं गार्भिकं चैनो द्विजानां अपमृज्यते 1 गर्भसंस्कार , जातकर्म , मुण्डन , उपनयन इन संस्कारों जाते हैं। से द्विजों के मातृ -पितृ -जन्य दोष  51 -मनुस्मृति , २/ २७ - ShareChat