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#Jai Shri Radhe
Jai Shri Radhe - निषेध भोजन के प्रकार भोजनः- जिस 466[ भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है। दूसरा भोजनः- जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई॰ पाव लग गया वह भोजन की थाली विष्टा के समान होती है। तीसरे प्रकार का भोजनः- जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है। चौथे प्रकार का भोजनः पापी स्त्री के साथ एक ही भोजन मदिरा के तुल्य होता है।  थाली में किया गया इसके अतिरिक्त अगर पत्नी, पति के भोजन करने के बाद उसी थाली में भोजन करती है या पति का बचा हुआ ಕ g ' खाती है तो उसे चारों धाम का फल प्राप्त होता है। अगर दो भाई एक थाली में भोजन कर रहे हो तो वह अमृतपान कहलाता है, चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है। बेटी अगर हो और अपने पिता के साथ एक कुवाँरी ही थाली में भोजन करती है तो उस पिता की कभी अकाल লুন্বু #f : होती, क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर बेटी को अपने पिता के साथ है। इसीलिए कुवाँरी = बैठकर भोजन करना चाहिये। जय जय श्री राधे श्रीजी की चरण सेवा निषेध भोजन के प्रकार भोजनः- जिस 466[ भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है। दूसरा भोजनः- जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई॰ पाव लग गया वह भोजन की थाली विष्टा के समान होती है। तीसरे प्रकार का भोजनः- जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है। चौथे प्रकार का भोजनः पापी स्त्री के साथ एक ही भोजन मदिरा के तुल्य होता है।  थाली में किया गया इसके अतिरिक्त अगर पत्नी, पति के भोजन करने के बाद उसी थाली में भोजन करती है या पति का बचा हुआ ಕ g ' खाती है तो उसे चारों धाम का फल प्राप्त होता है। अगर दो भाई एक थाली में भोजन कर रहे हो तो वह अमृतपान कहलाता है, चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है। बेटी अगर हो और अपने पिता के साथ एक कुवाँरी ही थाली में भोजन करती है तो उस पिता की कभी अकाल লুন্বু #f : होती, क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर बेटी को अपने पिता के साथ है। इसीलिए कुवाँरी = बैठकर भोजन करना चाहिये। जय जय श्री राधे श्रीजी की चरण सेवा - ShareChat