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#💖ਦਿਲ ਦੇ ਜਜ਼ਬਾਤ' #💖ਦਿਲ ਦੀਆਂ ਗੱਲਾਂ💖
💖ਦਿਲ ਦੇ ਜਜ਼ਬਾਤ' - "घर कभी खाली नहीं होता. बस लोग कम हो जाते हैं " भाई कमाने निकल गया, बहन ससुराल चली गई एक ही घर के दो चिराग , दुनिया में खो गए ওলা-ওলা से गूंजता " आँगन कभी हँसी U था आज वहाँ सन्नाटा सोता है॰ माँ की आँखें दरवाज़े पर टिकती हैं, पिता चुपचाप सब कुछ ढोता है एक रोटी चार में बंटती थी, टुकड़ों आज थाली पूरी रह जाती है. जिस घर में शोर कम नहीं होता था, अब घड़ी की टिकनटिक आती हैः सुनाई वक्त ने क्या खेल रचाया है, सब अपने होकर भी दूर हो गए. एक ही छत के नीचे पलने वाले, जहाँ में आज अलग अलग मजबूर हो गए और सच कहूँ तो. घर आज भी वही है, बस " घर वाले" कहीं खो गए श्रेया भारद्वाज "घर कभी खाली नहीं होता. बस लोग कम हो जाते हैं " भाई कमाने निकल गया, बहन ससुराल चली गई एक ही घर के दो चिराग , दुनिया में खो गए ওলা-ওলা से गूंजता " आँगन कभी हँसी U था आज वहाँ सन्नाटा सोता है॰ माँ की आँखें दरवाज़े पर टिकती हैं, पिता चुपचाप सब कुछ ढोता है एक रोटी चार में बंटती थी, टुकड़ों आज थाली पूरी रह जाती है. जिस घर में शोर कम नहीं होता था, अब घड़ी की टिकनटिक आती हैः सुनाई वक्त ने क्या खेल रचाया है, सब अपने होकर भी दूर हो गए. एक ही छत के नीचे पलने वाले, जहाँ में आज अलग अलग मजबूर हो गए और सच कहूँ तो. घर आज भी वही है, बस " घर वाले" कहीं खो गए श्रेया भारद्वाज - ShareChat