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##मेरे अल्फाज मेरे जज्बात..✍️ #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #🖋ग़ालिब की शायरी
#मेरे अल्फाज मेरे जज्बात..✍️ - কল ম होशियार था, दूनिया  বমলনা चाहता था। आज मैं बुद्धिमान हूँ खुद को बदल रहा हूँ । साहित्य दृष्टि रूमी : কল ম होशियार था, दूनिया  বমলনা चाहता था। आज मैं बुद्धिमान हूँ खुद को बदल रहा हूँ । साहित्य दृष्टि रूमी : - ShareChat