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#✒ शायरी #✍ कविता 📓
✒ शायरी - पतंग के कटने का ग़म नहीं থা সুন্নী, डर बसइतना था ठ  कहीं लूटने वाले उसे बेरहमी से কাড় না৯! पतंग के कटने का ग़म नहीं থা সুন্নী, डर बसइतना था ठ  कहीं लूटने वाले उसे बेरहमी से কাড় না৯! - ShareChat