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गीत मीत इक सम रखें, लगा गले के संग। सुर बिगड़े बनता नही , मन में रहे न अंग ॥ मन में रहे न अंग , बिगड़ते सारे रिश्ते । जीवन-लय हो भंग , इरादे रहें बदलते !! मीत प्रीत को साज , हरेक पल हो संगीत । गीत मीत में होय, बसे फिर मीत में गीत ॥ #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - ) J 9 »  ٠ ١ ti ) J 9 »  ٠ ١ ti - ShareChat