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#( हंसी मजाक तक )
( हंसी मजाक तक ) - m"ना कजरे कि धार ना मोतियों का हार ना किया कोई श्रंगार फिर भी इतनी सुंदर होm" उपरोक्त पंक्ति से प्रतीत होता है कि कवि अपनी पत्नी को ब्यटी पार्लर के लिए पैसे नहीं देना चाहता m"ना कजरे कि धार ना मोतियों का हार ना किया कोई श्रंगार फिर भी इतनी सुंदर होm" उपरोक्त पंक्ति से प्रतीत होता है कि कवि अपनी पत्नी को ब्यटी पार्लर के लिए पैसे नहीं देना चाहता - ShareChat