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#om shanti brahmakumari
om shanti   brahmakumari - वरदान :- सदा मनन द्वारा मगन अवस्था के सागर में समाने का अनुभव करने वाले अनुभवी मूर्त भव  अनुभवों को का आधार है मनन शक्ति। मनन @థT मगन अवस्था में योग लगाना मगन रहता है वाला स्वत नहीं पड़ता लेकिन निरन्तर लगा रहता है, मेहनत नहीं करनी मगन अर्थात् मुहब्बत के सागर में समाया हुआ, পভনী ऐसा समाया हुआ जो कोई अलग कर नहीं सकता। तो मेहनत से छूटो , सागर के बच्चे हो तो अनुभवों के तलाब में नहीं नहाओ लेकिन सागर में समा जाओ तब कहेंगे अनुभवी  মুন  स्लोगनः ज्ञान स्वरूप आत्मा वह है जिसका हर संकल्प , हर सेकण्ड समर्थ हो। शुभ विचार :- मनोबल को बढ़ाने के लिए कुछ पल मन के संकल्पों को ब्रेक देकर साइलेन्स में रहने का अभ्यास करो। इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह अव्यक्त इशारे जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो यदि कोई भी स्वभाव , संस्कार , व्यक्ति अथवा वैभव का बन्धन अपनी तरफ आकर्षित करता है, तो बाप के याद की आकर्षण सदैव नहीं रह सकती कर्मातीत बनना माना सर्व कर्म बन्धनों से मुक्त, न्यारे बन, प्रकृति द्वारा निमित्त-मात्र यह न्यारे बनने का कर्म कराना बार-बार करते पुरुषार्थ "বহান নালা सहज और स्वतः यह अनुभूति हो कि रहो और करने वाली यह कर्मेन्द्रियाँ हैं ही अलग ' वरदान :- सदा मनन द्वारा मगन अवस्था के सागर में समाने का अनुभव करने वाले अनुभवी मूर्त भव  अनुभवों को का आधार है मनन शक्ति। मनन @థT मगन अवस्था में योग लगाना मगन रहता है वाला स्वत नहीं पड़ता लेकिन निरन्तर लगा रहता है, मेहनत नहीं करनी मगन अर्थात् मुहब्बत के सागर में समाया हुआ, পভনী ऐसा समाया हुआ जो कोई अलग कर नहीं सकता। तो मेहनत से छूटो , सागर के बच्चे हो तो अनुभवों के तलाब में नहीं नहाओ लेकिन सागर में समा जाओ तब कहेंगे अनुभवी  মুন  स्लोगनः ज्ञान स्वरूप आत्मा वह है जिसका हर संकल्प , हर सेकण्ड समर्थ हो। शुभ विचार :- मनोबल को बढ़ाने के लिए कुछ पल मन के संकल्पों को ब्रेक देकर साइलेन्स में रहने का अभ्यास करो। इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह अव्यक्त इशारे जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो यदि कोई भी स्वभाव , संस्कार , व्यक्ति अथवा वैभव का बन्धन अपनी तरफ आकर्षित करता है, तो बाप के याद की आकर्षण सदैव नहीं रह सकती कर्मातीत बनना माना सर्व कर्म बन्धनों से मुक्त, न्यारे बन, प्रकृति द्वारा निमित्त-मात्र यह न्यारे बनने का कर्म कराना बार-बार करते पुरुषार्थ "বহান নালা सहज और स्वतः यह अनुभूति हो कि रहो और करने वाली यह कर्मेन्द्रियाँ हैं ही अलग ' - ShareChat