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#✍गुलजारांचे साहित्य
✍गुलजारांचे साहित्य - कंभी ' मासूमियत' इतनी थी कि हर चीज पर भरोसा था. 'तजुर्बा' इतना है कि सच्चाई ঔন पर भी यकीन नहीं होता..! ! कंभी ' मासूमियत' इतनी थी कि हर चीज पर भरोसा था. 'तजुर्बा' इतना है कि सच्चाई ঔন पर भी यकीन नहीं होता..! ! - ShareChat