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Geeta Gyan #गीता सार🙏 #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #🥰मोटिवेशन वीडियो #🙏कर्म क्या है❓
गीता सार🙏 - श्लोक असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्। अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते Il अर्थ हे अर्जुन, मन निश्चय ही चंचल और कठिन है, परन्तु अभ्यास और वैराग्य से इसे वश किया जा सकता है। भागवद गीता 6:35 ~ श्लोक असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्। अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते Il अर्थ हे अर्जुन, मन निश्चय ही चंचल और कठिन है, परन्तु अभ्यास और वैराग्य से इसे वश किया जा सकता है। भागवद गीता 6:35 ~ - ShareChat