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#Quran and We #points to ponder #सोचने वाली बात #Islam and We #*આપણે વિચારીશું ખરા?*
Quran and We - *(२) क़ुरआन ११:३* *और यूह कि तुमू अपने रब से क्षमा माँगो , फिर उसँकी ओर तौबा करके एक निश्चित l& 33TI 46 तुम्हें अवधि तक अच्छा जीवन प्रदान करेगा और हर व्यक्ति को उसका गुणी एुँकम नुँह प्रतिफल देगा| और यदि ক্কয স্ল,িদ্ধু लिए दिझे कौम्ह्यात यातना का डर हैं। (भयानक) * क़र लोनग *(3) 4:152* लोग अल्लाह पर और *और उसके सभी रसूलों पर ईमान लाते हैं और उनमें र्से किसी के बीच भेद नहीं करते, तो ऐसे ही लोगों को वह शीघ्र ही उनका प्रतिफल देगा| निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान है।* 10.59 AM 0 1 *(२) क़ुरआन ११:३* *और यूह कि तुमू अपने रब से क्षमा माँगो , फिर उसँकी ओर तौबा करके एक निश्चित l& 33TI 46 तुम्हें अवधि तक अच्छा जीवन प्रदान करेगा और हर व्यक्ति को उसका गुणी एुँकम नुँह प्रतिफल देगा| और यदि ক্কয স্ল,িদ্ধু लिए दिझे कौम्ह्यात यातना का डर हैं। (भयानक) * क़र लोनग *(3) 4:152* लोग अल्लाह पर और *और उसके सभी रसूलों पर ईमान लाते हैं और उनमें र्से किसी के बीच भेद नहीं करते, तो ऐसे ही लोगों को वह शीघ्र ही उनका प्रतिफल देगा| निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला, अत्यंत दयावान है।* 10.59 AM 0 1 - ShareChat