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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने" की कमब्खत वजह " ही नही मिलती मुस्कुराने " की ! न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने" की कमब्खत वजह " ही नही मिलती मुस्कुराने " की ! - ShareChat