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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - g 'किसी राष्ट्र के स्वाधीनता सर्वोपरि है' इस महान मूलमंत्र को शैशव और नवयुवाओं की नसों में प्रवाहित करने, तरुणों की सोई आत्मा को जगाकर देशव्यापी आंदोलन देने और युवा वर्ग की शौर्य शक्ति उद्भासित लिए के आजादी को आत्मप्रतिष्ठा कर राष्ट्र के युवकों का प्रश्न बना देने वाले नेताजी सुभाष चंद बोस ने पुरोहित की स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में प्रमुख HISI भूमिका सुभाषचंद्र बोस के जीवन का प्रेरक प्रसंग. नेताजी ने आत्मविश्वास, भाव-प्रवणता, कल्पनाशीलता और नवजागरण के बल पर युवाओं में राष्ट्र के प्रति मुक्ति व इतिहास की रचना का मंगल निश्चित, शंखनाद किया। मनुष्य इस संसार में एक निहित उद्देश्य की प्राप्ति, किसी संदेश को प्रचारित लिए जन्म लेता है। जिसकी जितनी शक्ति, करने के आकांक्षा और क्षमता है वह उसी के अनुरूप अपना कर्मक्षेत्र निर्धारित करता है। g 'किसी राष्ट्र के स्वाधीनता सर्वोपरि है' इस महान मूलमंत्र को शैशव और नवयुवाओं की नसों में प्रवाहित करने, तरुणों की सोई आत्मा को जगाकर देशव्यापी आंदोलन देने और युवा वर्ग की शौर्य शक्ति उद्भासित लिए के आजादी को आत्मप्रतिष्ठा कर राष्ट्र के युवकों का प्रश्न बना देने वाले नेताजी सुभाष चंद बोस ने पुरोहित की स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में प्रमुख HISI भूमिका सुभाषचंद्र बोस के जीवन का प्रेरक प्रसंग. नेताजी ने आत्मविश्वास, भाव-प्रवणता, कल्पनाशीलता और नवजागरण के बल पर युवाओं में राष्ट्र के प्रति मुक्ति व इतिहास की रचना का मंगल निश्चित, शंखनाद किया। मनुष्य इस संसार में एक निहित उद्देश्य की प्राप्ति, किसी संदेश को प्रचारित लिए जन्म लेता है। जिसकी जितनी शक्ति, करने के आकांक्षा और क्षमता है वह उसी के अनुरूप अपना कर्मक्षेत्र निर्धारित करता है। - ShareChat