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#💌 મારી ગઝલ 💝
💌 મારી ગઝલ 💝 - गजल मैं बूढ़ा हो गया लेकिन जवानी नहीं जाती कमा कर खाने की मेरी आदत नहीं जाती सभी बच्चों को कह दिया बेफिक्र रहो तुम किसी के भी कंधों पर मेरी लाशें नहीं जाती तमन्ना थी की अपने पैरों पर खड़ा हों जाऊं उंगली हाथ से वालिद की छोड़़ी नहीं जाती जमाना ये समझता है मैं बे अक्ल हुं कितना मक्कारों की सोहबत में वफादारी नहीं जाती कभी सोचा हाथ फैला कर मांगु चंद पैसे मै बंसी है वो ख़ुद्दारी नहीं जाती TR ತಕ खून में अपनी बेबसी को छुपाना मुझे खूब आता है उछालने की सिक्के मेरी रियाकारी नहीं जाती H अल्ताफ मुल्ला गजल मैं बूढ़ा हो गया लेकिन जवानी नहीं जाती कमा कर खाने की मेरी आदत नहीं जाती सभी बच्चों को कह दिया बेफिक्र रहो तुम किसी के भी कंधों पर मेरी लाशें नहीं जाती तमन्ना थी की अपने पैरों पर खड़ा हों जाऊं उंगली हाथ से वालिद की छोड़़ी नहीं जाती जमाना ये समझता है मैं बे अक्ल हुं कितना मक्कारों की सोहबत में वफादारी नहीं जाती कभी सोचा हाथ फैला कर मांगु चंद पैसे मै बंसी है वो ख़ुद्दारी नहीं जाती TR ತಕ खून में अपनी बेबसी को छुपाना मुझे खूब आता है उछालने की सिक्के मेरी रियाकारी नहीं जाती H अल्ताफ मुल्ला - ShareChat