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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - "खुली किताब थे हम ।। सभी अनपढ़ों के अफसोस. हाथ लग गए.... "खुली किताब थे हम ।। सभी अनपढ़ों के अफसोस. हाथ लग गए.... - ShareChat