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कवि सुमित मानधना 'गौरव' ( "कुछ मेरी कलम से ")
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7 दिन पहले
आई कितनी होली। गई कितनी होली। दिल चाहता आए, अबकी ऐसी होली। पास मेरे भी आकर, बोले वो मेरी भोली। रंग दे मुझे सुमित, अब मैं तेरी हो ली! ना जानू मैं दूजी भाषा, जानू प्रेम रंग की बोली। #sumitkikalamse ✍सुमित मानधना 'गौरव', सूरत 😎
#sumitgaurav
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