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#☪ सूफी संगीत 🕌 #❤️अस्सलामु अलैकुम
☪ सूफी संगीत 🕌 - 12:36 AM 323 VoLIEiII रुला देने वाली नात जा कर कोई तयबा में ये आक़ा को बताए गुज़रे हुए लम्हों की बहुत याद सताए मत छेड़, सबा ! मुझ को अभी ज़ख़्म हरे हैं ऐसा न हो फिर आँख से आँसू निकल आए दुनिया में फ़क़त आप की हस्ती है वो हस्ती जिस से कि उजाला ही उजाला नज़र आए फिर माँ सी मुझे गोद की ठंडक हुई हासिल है याद मुझे, गुंबद-ए ख़ज़रा ! तेरे साए मुजरिम हूँ, चला आया हूँ मैं आप के दरपर के मुजरिम को भला कौन बचाए 3Iq जब से सू-ए-्बतहा का ये शैदाई हुआ है तब से दिल-ए-्बेताब कहीं चैन न पाए फिर आए बुलावा मुझे दरबार-ए-्नबी से अल्लाह कभी खैर से ये दिन भी दिखाए अहमद रहे ता-'उम्र इसी दर का ही नौकर ऐ काश ! इसी दर पे इसे मौत भी आए २x speed 12:36 AM 323 VoLIEiII रुला देने वाली नात जा कर कोई तयबा में ये आक़ा को बताए गुज़रे हुए लम्हों की बहुत याद सताए मत छेड़, सबा ! मुझ को अभी ज़ख़्म हरे हैं ऐसा न हो फिर आँख से आँसू निकल आए दुनिया में फ़क़त आप की हस्ती है वो हस्ती जिस से कि उजाला ही उजाला नज़र आए फिर माँ सी मुझे गोद की ठंडक हुई हासिल है याद मुझे, गुंबद-ए ख़ज़रा ! तेरे साए मुजरिम हूँ, चला आया हूँ मैं आप के दरपर के मुजरिम को भला कौन बचाए 3Iq जब से सू-ए-्बतहा का ये शैदाई हुआ है तब से दिल-ए-्बेताब कहीं चैन न पाए फिर आए बुलावा मुझे दरबार-ए-्नबी से अल्लाह कभी खैर से ये दिन भी दिखाए अहमद रहे ता-'उम्र इसी दर का ही नौकर ऐ काश ! इसी दर पे इसे मौत भी आए २x speed - ShareChat