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दिखने में सब ठीक लगता है,
पर हर घर अपने अपने
बोझ उठाये बैठा है।
कहीं शब्दों की कमी है,
तो कहीं समझ की,
कहीं आवाज़ें ऊँची हैं,
तो कहीं खामोशियाँ गहरी।
हर घर में प्यार भी है,
थोड़ी लड़ाई भी,
थकान भी,
और उम्मीदें भी हैं।
सच तो ये है कि
घर वही खुशहाल है,
जहाँ लोग एक दूसरे को,
थोड़ा समझ लेते हैं,
थोड़ा माफ़ कर देते हैं।
🛖 सुप्रभात 🛖 #🌞 Good Morning🌞

