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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - हजारों दीप जलाकर मंदिर को रोशन करने से बेहतर है, किसी अंधेरे घर में एक उम्मीद का दीया जला देना। आप परमात्मा को छप्पन भोग तो लगा देते हैं, परद्वार पर खड़े भूखे को खाली हाथ मोड़ देते हैं। याद रखना , पत्थर की मूरत में बसने वाला वह नारायण भी तभी प्रसन्न होता है, जब आप उसके बनाए हुए बंदों की सेवा करते हैं। सच्ची भक्ति फेरने में नहीं, बल्कि किसी की माला आँख के आँसू पोंछने में है। हजारों दीप जलाकर मंदिर को रोशन करने से बेहतर है, किसी अंधेरे घर में एक उम्मीद का दीया जला देना। आप परमात्मा को छप्पन भोग तो लगा देते हैं, परद्वार पर खड़े भूखे को खाली हाथ मोड़ देते हैं। याद रखना , पत्थर की मूरत में बसने वाला वह नारायण भी तभी प्रसन्न होता है, जब आप उसके बनाए हुए बंदों की सेवा करते हैं। सच्ची भक्ति फेरने में नहीं, बल्कि किसी की माला आँख के आँसू पोंछने में है। - ShareChat