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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - বন কী ২ন मुट्ठी में भींचूँ जितना, उतना ही फिसलता है, ये वक्त है साहब , किसी के रोके कहाँ रुकता है। जैसे हथेली से गिरती रेत की धार है, बीतता हर लम्हा , बस यादों का अंबार है। में अपने कुछ भी नहीं, सब ऊपर वाले का खेल है, ೯೫1 कभी खुशियों की धूप, तो कभी गम की रेल है। वक्त ने साथ न दिया, तो क्या गिला करें, खुद अपनी हिम्मत से, क्यों न हम नए रास्ते बुनें। माना कि इम्तिहान कडे हैं, और राहें भी अनजान , पर रेखा के इरादों में , बसता है एक आसमान। दो दिन की है ये जिंदगी , फिर तो चले ही जाना है, आज के इस पल को, बस महादेव के नाम सजाना है। বন কী ২ন मुट्ठी में भींचूँ जितना, उतना ही फिसलता है, ये वक्त है साहब , किसी के रोके कहाँ रुकता है। जैसे हथेली से गिरती रेत की धार है, बीतता हर लम्हा , बस यादों का अंबार है। में अपने कुछ भी नहीं, सब ऊपर वाले का खेल है, ೯೫1 कभी खुशियों की धूप, तो कभी गम की रेल है। वक्त ने साथ न दिया, तो क्या गिला करें, खुद अपनी हिम्मत से, क्यों न हम नए रास्ते बुनें। माना कि इम्तिहान कडे हैं, और राहें भी अनजान , पर रेखा के इरादों में , बसता है एक आसमान। दो दिन की है ये जिंदगी , फिर तो चले ही जाना है, आज के इस पल को, बस महादेव के नाम सजाना है। - ShareChat