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#satya vachan
satya vachan - मणिकर्णिका घाट पर माता पार्वती की घूमते-घूमते कान की मणि गिर गई थी तो शंकर जी से कहती है, " ढूंढो आप।" वह बहुत ढूंढे पर II नहीं मिली तो भगवान नारायण से कहा, उन्होंने पार्वती के कान की मणि गिर गई है मिल नहीं रही है।" तो कहते हैं भगवान नारायण ने चक्र चलाया और चक्र चलाकर धरती के अंदर ढूंढा तब भी नहीं मिली। तभी से उस जगह का नाम मणिकर्णिका घाट नाम पड़ गया। वहां चिताएं हमेशा जलती रहती हैं पता है क्यों ? माता पार्वती है, इस गंगा के घाट ने मेरा झुमका लौटाया कहती नहीं है मुझे पता है कि वो गंगा में है पर यह लौटा नहीं रही है। लिए आज जैसे मेरा दिल जल रहा है तो इसके ना ऐसे ही यहां अग्नि जलती रहेगी यहां चिताएं जलती रहेंगी| मणिकर्णिका घाट पर माता पार्वती की घूमते-घूमते कान की मणि गिर गई थी तो शंकर जी से कहती है, " ढूंढो आप।" वह बहुत ढूंढे पर II नहीं मिली तो भगवान नारायण से कहा, उन्होंने पार्वती के कान की मणि गिर गई है मिल नहीं रही है।" तो कहते हैं भगवान नारायण ने चक्र चलाया और चक्र चलाकर धरती के अंदर ढूंढा तब भी नहीं मिली। तभी से उस जगह का नाम मणिकर्णिका घाट नाम पड़ गया। वहां चिताएं हमेशा जलती रहती हैं पता है क्यों ? माता पार्वती है, इस गंगा के घाट ने मेरा झुमका लौटाया कहती नहीं है मुझे पता है कि वो गंगा में है पर यह लौटा नहीं रही है। लिए आज जैसे मेरा दिल जल रहा है तो इसके ना ऐसे ही यहां अग्नि जलती रहेगी यहां चिताएं जलती रहेंगी| - ShareChat