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✍️ साहित्य एवं शायरी - हक़ीम न जाने कितने, दवा-एन्दर्द दे गए लेकिन. नज़र चौखट पर ही रही, वज़ह एन्मर्ज़ जाने कब आये. हक़ीम न जाने कितने, दवा-एन्दर्द दे गए लेकिन. नज़र चौखट पर ही रही, वज़ह एन्मर्ज़ जाने कब आये. - ShareChat