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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - कभी ्कभी हम बिना।। गलती किए भी बुरै बन जाते हैं॰॰॰ क्योंकि हृम वैसा नहीं कर पाते जैसा लोग चाहते हैँ॰॰०४! आपका अपना कभी ्कभी हम बिना।। गलती किए भी बुरै बन जाते हैं॰॰॰ क्योंकि हृम वैसा नहीं कर पाते जैसा लोग चाहते हैँ॰॰०४! आपका अपना - ShareChat