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#भागवत पुराण #👍लाईफ कोट्स #😇भक्ती स्टेट्स #🙏भक्ती सुविचार📝 #☺️उच्च विचार
भागवत पुराण - कर्म के तीन मार्गः त्याग का रहस्य गीता सच्चा त्यागी कौन है? भगवद का सार जो कर्मफल का त्याग करता हे॰ वही सच्चा त्यागी ह। (श्लोक १८/ ११l त्याग तीन प्रकार का होता है श्रीमद्धगवदगीता का यह अंतिम अध्याय सच्चे त्याग का रहस्य समझाता हे आधार पर त्याग सात्विक Buiಹ इलका अर्थ कर्मों को छोडना नहीं वल्कि अपने क्तव्य को फल को इच्छा के रा्जासिक ओर तामासेक होता ह। विना करना है। यह अध्याय कर्म, ज्ञान और सुख को तीन गुणों के आधार पर  লাক 18/4] wliea करता हे ताकि व्याक्ते को मुक्ति क भाग पर मागदरान निल सरक।  सात्विक राजसिक तामसिक (Sattvic ( Rajasic) (Tamasic) कर्म कर्म कर्म अईकार ओर रर्तच्च भाव से॰ मोहओर अलान फल की हच्छा फल को इच्छा से মংমিয়া দমা নিনা (18//23]  (18/24)  (18/25) ज्ञान ज्ञान ज्ञान सव में एक সাণিত্রী ঐ एक ही कार्यको अविनाणी आऱ्या मेद देखना सव कुछ मानना ঐষনা (18/20|  (18/21) (18/22) सुख ಶತ सुख में विष, आरपप में अमृत, अंत में आरमप शरू आर 3i7 ಗ 30ಗ' সন স বিদ  माटकारी (18/37) (18/38) (18/39)  सिद्धि का मार्ग परम अपने स्वभाव नियत ईश्वर को সসপতা কা কল: कर्म का पालन करें पूर्ण समर्पण करें परम शांति दोपपक्त होने पर भी अपना सभी थर्मोको त्यागकर ईश्वर की कृमा से ही परम शांति  ಹdd ईश्वर की भरण में जाए।  ম্বরামাণিক কর্ম কন্মধে সম্ত EI  और शाश्वत पद घान् होता हे। [লীক 18/47] 95|6 18/66] (श्लाक १८/६२) NotebookLM कर्म के तीन मार्गः त्याग का रहस्य गीता सच्चा त्यागी कौन है? भगवद का सार जो कर्मफल का त्याग करता हे॰ वही सच्चा त्यागी ह। (श्लोक १८/ ११l त्याग तीन प्रकार का होता है श्रीमद्धगवदगीता का यह अंतिम अध्याय सच्चे त्याग का रहस्य समझाता हे आधार पर त्याग सात्विक Buiಹ इलका अर्थ कर्मों को छोडना नहीं वल्कि अपने क्तव्य को फल को इच्छा के रा्जासिक ओर तामासेक होता ह। विना करना है। यह अध्याय कर्म, ज्ञान और सुख को तीन गुणों के आधार पर  লাক 18/4] wliea करता हे ताकि व्याक्ते को मुक्ति क भाग पर मागदरान निल सरक।  सात्विक राजसिक तामसिक (Sattvic ( Rajasic) (Tamasic) कर्म कर्म कर्म अईकार ओर रर्तच्च भाव से॰ मोहओर अलान फल की हच्छा फल को इच्छा से মংমিয়া দমা নিনা (18//23]  (18/24)  (18/25) ज्ञान ज्ञान ज्ञान सव में एक সাণিত্রী ঐ एक ही कार्यको अविनाणी आऱ्या मेद देखना सव कुछ मानना ঐষনা (18/20|  (18/21) (18/22) सुख ಶತ सुख में विष, आरपप में अमृत, अंत में आरमप शरू आर 3i7 ಗ 30ಗ' সন স বিদ  माटकारी (18/37) (18/38) (18/39)  सिद्धि का मार्ग परम अपने स्वभाव नियत ईश्वर को সসপতা কা কল: कर्म का पालन करें पूर्ण समर्पण करें परम शांति दोपपक्त होने पर भी अपना सभी थर्मोको त्यागकर ईश्वर की कृमा से ही परम शांति  ಹdd ईश्वर की भरण में जाए।  ম্বরামাণিক কর্ম কন্মধে সম্ত EI  और शाश्वत पद घान् होता हे। [লীক 18/47] 95|6 18/66] (श्लाक १८/६२) NotebookLM - ShareChat