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#❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #❤️जीवन की सीख #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #होलिका दहन दिवस
❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस - होलिका दहन बंद करो बुद्धिजीवियों ओर शिक्षित महानुभावो से मेरा दर्सकों युवाओं T निवेदन हैं की होलिका दहन कोई खुशी का त्यौहार नहीं हैं बल्कि एक पीडित महिला की सीख पुकार ओर उसके साथ हुए शारीरिक से जुडी एक भयानक घटना है जिसमे बहन शोषण च दरिंदगी लिका के साथ कुस असामाजिक तत्व. के लोगो कर उन्हें दुष्कर्म जिन्दा जला दिया गया. क्योंकि होलिका किसी की बहन थी किसी की बेटी लेकिन कुस दरिंदो ने उसके दरिंदगी की ओर सच को सुपाने के लिए साथ की सीता से निकली हुई होलिका को जब जलाया गया तो उसी हवा मे उड़ा दिया ओर रंगों का त्यौहार घोसित कर दिया राख. का हम सब एक दूसरे पर रंग डालते हैं चो कोई खुशी का आज मनोरंजन नहीं हैं बल्कि चो एक पीड़ित महिला की सीता की राख . क्यू होती हैं ओर सोचो अगर होलिका गलत थी तो फिर उसकी पूजा अगर होलिका सही थी तो उसको जिन्दा क्यू जला दिया गया.. क्या आपके पास इसका जवाब हैं.. नहीं हैं की क्युकी आप सब तर्क की नहीं करते ओर नहीं सच को स्वीकार करते हैं आप लोग केवल बात अंधविश्वास व पाखंडवाद बढ़ावा देते हैं इसीलिए इस देश मे सच को कोई सुनना नहीं साहता ओर प्रसार प्रचार हो रहा हैं.. 9 इसीलिए आज भारत वर्ष मे लग भग बहुत से लोग आज एक बार দি होलिका को जलाएंगे ओर उनकी आत्मा को जलील करेंगे. . सच तो ये हैं की होलिका दहन दिवस बंद होना साहिये ओर कन इस दिन को शहादत दिवस के रूप मे मनाया जाना साहिये. आओ हम सब मिलकर बहन होलिका कुमारी के लिए उनकी आत्मा के लिए प्रार्थना करते हैं. लेखक कैलाश कुमार जोगावत होलिका दहन बंद करो बुद्धिजीवियों ओर शिक्षित महानुभावो से मेरा दर्सकों युवाओं T निवेदन हैं की होलिका दहन कोई खुशी का त्यौहार नहीं हैं बल्कि एक पीडित महिला की सीख पुकार ओर उसके साथ हुए शारीरिक से जुडी एक भयानक घटना है जिसमे बहन शोषण च दरिंदगी लिका के साथ कुस असामाजिक तत्व. के लोगो कर उन्हें दुष्कर्म जिन्दा जला दिया गया. क्योंकि होलिका किसी की बहन थी किसी की बेटी लेकिन कुस दरिंदो ने उसके दरिंदगी की ओर सच को सुपाने के लिए साथ की सीता से निकली हुई होलिका को जब जलाया गया तो उसी हवा मे उड़ा दिया ओर रंगों का त्यौहार घोसित कर दिया राख. का हम सब एक दूसरे पर रंग डालते हैं चो कोई खुशी का आज मनोरंजन नहीं हैं बल्कि चो एक पीड़ित महिला की सीता की राख . क्यू होती हैं ओर सोचो अगर होलिका गलत थी तो फिर उसकी पूजा अगर होलिका सही थी तो उसको जिन्दा क्यू जला दिया गया.. क्या आपके पास इसका जवाब हैं.. नहीं हैं की क्युकी आप सब तर्क की नहीं करते ओर नहीं सच को स्वीकार करते हैं आप लोग केवल बात अंधविश्वास व पाखंडवाद बढ़ावा देते हैं इसीलिए इस देश मे सच को कोई सुनना नहीं साहता ओर प्रसार प्रचार हो रहा हैं.. 9 इसीलिए आज भारत वर्ष मे लग भग बहुत से लोग आज एक बार দি होलिका को जलाएंगे ओर उनकी आत्मा को जलील करेंगे. . सच तो ये हैं की होलिका दहन दिवस बंद होना साहिये ओर कन इस दिन को शहादत दिवस के रूप मे मनाया जाना साहिये. आओ हम सब मिलकर बहन होलिका कुमारी के लिए उनकी आत्मा के लिए प्रार्थना करते हैं. लेखक कैलाश कुमार जोगावत - ShareChat