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#प्रकृति का उपहार
प्रकृति का उपहार - @kaavyapedia जिस किसी के पास भी दिन का दो-तिहाई हिस्सा ख़ुद के लिए ` नहीं है, वो गुलाम है। फ्रेडरिक नीत्शे : काव्यपीडिया @kaavyapedia जिस किसी के पास भी दिन का दो-तिहाई हिस्सा ख़ुद के लिए ` नहीं है, वो गुलाम है। फ्रेडरिक नीत्शे : काव्यपीडिया - ShareChat