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दिन ढला जाता है शाम आती है घबराता हूँ मैं डूबता जाता है सूरज डूबता जाता हूँ मैं – नज़ीर बनारसी #📖 कविता और कोट्स✒️ #📓 हिंदी साहित्य #✍️ साहित्य एवं शायरी
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