ShareChat
click to see wallet page
search
#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - जब चेतना सोई होती है तब कर्म तो होता है,पर योग नहीं होता क्योंकि योग के लिए स्मृति चाहिए मैं कर्ता नहीं , मैं साक्षी हूँ तब कर्म बंधन बन जाता है क्योंकि उसमें फल आकांक्षा और अहंकार जुड़ा होता है धर्म भी स्वार्थ से रंग जाता है धर्म साधना न रहकर पहचान, पद, या मान का साधन बन जाता है सेवा भी अहंकार से दूषित हो जाती है मैं कर रहा हूँ मेरे कारण हुआ यही बंधन है! जब चेतना सोई होती है तब कर्म तो होता है,पर योग नहीं होता क्योंकि योग के लिए स्मृति चाहिए मैं कर्ता नहीं , मैं साक्षी हूँ तब कर्म बंधन बन जाता है क्योंकि उसमें फल आकांक्षा और अहंकार जुड़ा होता है धर्म भी स्वार्थ से रंग जाता है धर्म साधना न रहकर पहचान, पद, या मान का साधन बन जाता है सेवा भी अहंकार से दूषित हो जाती है मैं कर रहा हूँ मेरे कारण हुआ यही बंधन है! - ShareChat