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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #💌शब्द से शायरी✒️
🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 - (1 M फासले इस कदर है आज कल के रिश्तों में, जैसे कोई घर खरीदा हो किश्तों में.. !! (1 M फासले इस कदर है आज कल के रिश्तों में, जैसे कोई घर खरीदा हो किश्तों में.. !! - ShareChat