जिस देश में अभी भी करोड़ों लोग भूखे सोते हों, उस देश में जूठन छोड़ने को अपराध घोषित करना चाहिए और जूठन छोड़ने पर दंड या जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए।
ये जो जीमते समय इतनी जूठन छोड़ते है, कोई इनसे पूछे जब ये दुकान पर खरीद कर खाते है तब भी ऐसे ही नवाबों की तरह आधा खा कर फेंक देते है क्या?
जीमण में प्लेट को ठसाठस भरकर,आधा खाके कचरा पात्र में फेंक देने वाले लोग दुकान पर नमकीन या कचौरी के अंतिम अवशेषों को भी फाँकते देखे गए है। नहीं?
गरुड़ पुराण में लिखा है कि जूठन छोड़ने वाले को अगले जन्म मे वराह बनना पड़ता है।
घर में भी जूठन छोड़कर उसको उगाने वाले किसान का, उसे खरीदने वाले पिता का और उसे बनाने वाली माता का अपमान ना करें।
जो कदर करे अन्न दाणा की
बठै कमी ना आये खाणा की
जी घर इज्जत अन्न
बा घर सदा प्रसन्न
आज ही संकल्प लें!
#कड़वी सच्चाई #कड़वा सच्च


