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#⚖️SC की फटकार के बाद NCERT का यू-टर्न 🤔
⚖️SC की फटकार के बाद NCERT का यू-टर्न 🤔 - किया। कई सौ वर्षों से लोग पत्थर को तराशने, संगीत रचने और यहाँ तक कि भोजन बनाने के नए तरीकों के बारे में एक॰ दूसरे के विचारों को अपनाते रहे हैं। देश के नाम अपने देश के लिए हम प्रायः इण्डिया तथा भारत जैसे नामों का प्रयोग करते हैं। इण्डिया शब्द इण्डस से निकला है जिसे संस्कृत में सिंधु कहा जाता है। में ईरान और यूनान का पता लगाओ। लगभग २५०० वर्ष पूर्व अपने एटलस उत्तर पश्चिम की ओर से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को हिंदोस अथवा इंदोस और इस नदी के पूर्व में स्थित भूमि प्रदेश को इण्डिया के एक समूह कहा। भरत नाम का प्रयोग उत्तर पश्चिम में रहने वाले लोगों ক লিব ক্িমা था। इस समूह का उल्लेख संस्कृत की आरंभिक जाता ( लगभग ३५०० वर्ष पुरानी ) कृति ऋग्वेद में भी मिलता है। बाद में इसका प्रयोग देश के लिए होने लगा। अतीत के बारे में कैसे जानें? अतीत की जानकारी हम कई तरह से प्राप्त कर सकते हैं। इनमें से एक तरीका को ढूँढ़ना और पढ़ना है। ये अतीत में लिखीं गई 819 # पुस्तकें पुस्तकों लिखी होने के कारण पाण्डुलिपि कही जाती हैं। अंग्रेज़ी में ' पाण्डुलिपि ' के ' मैन्यूस्क्रिप्ट ' शब्द लैटिन शब्द ` मेनू ' जिसका अर्थ लिए प्रयुक्त होने वाला से निकला है। ये पाण्डुलिपियाँ प्रायः ताड़पत्रों अथवा हिमालय क्षेत्र हाथ है में उगने वाले भूर्ज नामक पेड़ की छाल से विशेष तरीके से तैयार भोजपत्र Rर लिखी मिलती हैं। 3833*619೩.2343/4 2ಪ,48 |2a3e =9 ಊanu masgine 5l wssz da{937 :Clca  Naihna ಇa236mn4a34.316 Vn{3n 4m7ಪ Samarait 7850 MOxnaelrar7ಲ 4]]3] 03133 ೧ು =75~@~~0~0 किया। कई सौ वर्षों से लोग पत्थर को तराशने, संगीत रचने और यहाँ तक कि भोजन बनाने के नए तरीकों के बारे में एक॰ दूसरे के विचारों को अपनाते रहे हैं। देश के नाम अपने देश के लिए हम प्रायः इण्डिया तथा भारत जैसे नामों का प्रयोग करते हैं। इण्डिया शब्द इण्डस से निकला है जिसे संस्कृत में सिंधु कहा जाता है। में ईरान और यूनान का पता लगाओ। लगभग २५०० वर्ष पूर्व अपने एटलस उत्तर पश्चिम की ओर से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को हिंदोस अथवा इंदोस और इस नदी के पूर्व में स्थित भूमि प्रदेश को इण्डिया के एक समूह कहा। भरत नाम का प्रयोग उत्तर पश्चिम में रहने वाले लोगों ক লিব ক্িমা था। इस समूह का उल्लेख संस्कृत की आरंभिक जाता ( लगभग ३५०० वर्ष पुरानी ) कृति ऋग्वेद में भी मिलता है। बाद में इसका प्रयोग देश के लिए होने लगा। अतीत के बारे में कैसे जानें? अतीत की जानकारी हम कई तरह से प्राप्त कर सकते हैं। इनमें से एक तरीका को ढूँढ़ना और पढ़ना है। ये अतीत में लिखीं गई 819 # पुस्तकें पुस्तकों लिखी होने के कारण पाण्डुलिपि कही जाती हैं। अंग्रेज़ी में ' पाण्डुलिपि ' के ' मैन्यूस्क्रिप्ट ' शब्द लैटिन शब्द ` मेनू ' जिसका अर्थ लिए प्रयुक्त होने वाला से निकला है। ये पाण्डुलिपियाँ प्रायः ताड़पत्रों अथवा हिमालय क्षेत्र हाथ है में उगने वाले भूर्ज नामक पेड़ की छाल से विशेष तरीके से तैयार भोजपत्र Rर लिखी मिलती हैं। 3833*619೩.2343/4 2ಪ,48 |2a3e =9 ಊanu masgine 5l wssz da{937 :Clca  Naihna ಇa236mn4a34.316 Vn{3n 4m7ಪ Samarait 7850 MOxnaelrar7ಲ 4]]3] 03133 ೧ು =75~@~~0~0 - ShareChat