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*भोजन-दान की महत्ता* *“हे गृहपति! भोजन का दान करने वाला आर्य-श्रावक भोजन ग्रहण करने वाले को इन चार चीजों का दान करता है।"* *“यो सञ्ञतानं परदत्तभोजिनं,* *कालेन सक्कच्च ददाति भोजनं ।* *चत्तारि ठानानि अनुप्पवेच्छति,* *आयुञ्च वण्णञ्च सुखं बलञ्च ॥* *"सो आयुदायी वण्णदायी,* *सुखं बलं ददो नरो* *दीघायु यसवा होति,* *यत्थ यत्थूपपज्जति ॥”* - अङ्गुत्तरनिकाय १.४.५८, सुदत्तसुत्त *[जो दूसरों का दिया खाने वाले संयत जनों को योग्य विधि से भोजन का दान करता है वह उन्हें चार चीजों का दान करता है - आयु, वर्ण, सुख तथा बल । वह आयु, वर्ण, सुख तथा बल का दान करने वाला जहां कहीं भी जन्म ग्रहण करता है वह दीर्घायु एवं यशस्वी होता है।]* पुस्तक: *भगवान बुद्ध के अग्रउपासक* "*अनाथपिण्डिक" (दायकों में “अग्र”) ।* विपश्यना विशोधन विन्यास ॥ *भवतु सब्ब मंङ्गलं !!* #साधु साधु साधु 🙏🪷☸️🪷🙏 #🙏🪷☸️साधु साधु साधु ☸️🪷🙏 #☸️साधु साधु साधु ☸️ #💪बुद्धांची तत्वे📜 #बुद्धगया
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