ShareChat
click to see wallet page
search
#GodMorningWednesday #किसानगौरव_सम्मान_संतरामपालजी .जग ने मारे पत्थर, तुने बांटे फूल रे जो तोकूं काँटा बोवै, ताको बो तू फूल। तोहे फूल के फूल है, वाको है त्रिशूल।। कबीर साहिब जी कहते हैं कि यदि कोई आपको कष्ट देता है तो आप उसका उपकार करने की धारण बनाए, उसका भला करें। आपको तो सुख रूपी फूल प्राप्त होंगे और जो आपको कष्ट रूपी काँटे दे रहा था, उसको तीन गुणा कष्ट रूपी काँटे। सन्त रामपाल जी महाराज के करौंथा आश्रम और बरवाला आश्रम में लोगों ने आर्य समाज द्वारा गलत तरिको से भड़काये गये ग्रामीण लोगों ने पत्थर मारे। जुड़े इल्जाम लगाये गये व झुठे केश बनाकर कैद में सन्त रामपाल जी महाराज को डाला गया। जब हकिकत आर्य समाज द्वारा भ्रमित समाज को असलियत पता लगी तब आज रो रहे हैं कि हमसे भारी भूल हुई। संत रामपाल जी महाराज ने उनको क्षमा किया और उनकी भलाई के लिए कार्य किये। सन्त तुकाराम की पत्नी छत पर खड़ी देख रही थी कि उसके पति गन्ने का एक झारा लिये आ रहे हैं। वह नीचे आकर उनकी प्रतीक्षा करने लगी। संत तुकाराम के हाथ में केवल एक गन्ना देखकर वह आपे से बाहर हो गायी, उसने खींचकर गन्ना तुकाराम की पीठ पर जड़ दिया। तुकाराम अचानक के प्रहार से देहली की चौखट से टकरा गये, सिर से खून बहने लगा। खून पोंछकर उठकर बोले कि हे दयामयी ! तू कितनी अच्छी है, जिस गन्ने को तोड़ने की जहमत मुझे उठानी पड़ती, उसके दो टुकड़े तूने कर दिये, ले एक तू खा, एक मैं खाऊँ।' रावण का पद-प्रहार सहकर भी विभीषण ने इतना ही कहा था कि आप मेरे पिता के समान हैं, आप राम की शरण में जाकर ही चैन से रह सकेंगे। भृगु ने भगवान् विष्णु को छातीपर पद-प्रहार किया, परंतु विष्णु उनका पैर सहलाने लगे। विष्णु जी ने कहा था कि ऋषिवर ! मेरी छाती तो वज्र के समान है, आपके पैर कोमल हैं, चोट लग गयी होगी। भगवान् बुद्ध को जब एक व्यक्ति ने आधे घण्टे तक गालियाँ दीं तो वे बोले कि मुझे दूसरे गाँव जाना है। यदि और गालियाँ बच गयी हों, तो कल मैं यहीं पर इसी समय आऊँगा, आदमी पानी पानी हो गया। रामकृष्ण परमहंस एक भक्त के यहाँ भोजन के लिये निमन्त्रित थे, किंतु बहुत देर तक भी जब उस व्यक्ति ने उनकी सार- सम्हाल नहीं की, तो उनके साथी ने कहा कि चलिये महाराज ! यहाँ से चलते हैं, परमहंस बोले कि इतनी रात को खाना कहाँ खाऊँगा, तिस पर गाड़ीका किराया तीन रुपया कहाँ से दूँगा, इतने में ही भक्तको अपनी गलती का अहसास हुआ, वह दौड़ा हुआ आया और क्षमा-याचना की। रामकृष्ण हँसने लगे। रमण महर्षि के आश्रममें कुछ चोरों ने आकर महर्षि की पिटाई की और धन सम्प्पति बताने को कहा। सुबह पुलिस के पूछने पर वे इतना ही बोले कि कुछ नादान रात में को आये थे। हसते हुए बोले कि उन्होंने मेरी पूजा भी की, किंतु मुझे उनके प्रति कोई शिकायत नहीं। सन्त एकनाथ गोदावरी में स्नान किया करते थे, इससे चिढ़कर एक पठान ने उनके ऊपर एक सौ आठ बार थूका। सन्त ने कहा आज गोदावरी में स्नान का खूब अवसर मिला। पठानने लज्जित होकर क्षमा माँगी। दक्षिण के सन्त तिरुवल्लुवर को धोती की गाँठ ले जाते देखकर एक उद्दण्ड युवकने आवाज लगायी। ऐ बूढ़े ! क्या है गाँठ में? सन्त ने कहा धोतियाँ हैं, दिखा, एक की कीमत क्या है? बीस रुपये, उसने धोती के दो टुकड़े कर दिये। पूछा अब ? दस रुपये, वह टुकड़े करता रहा और सन्त शान्ति से कीमत बताते रहे। सन्त की शान्तिने युवक को रुला दिया, उसने सन्त से क्षमा माँगी। सुकरात पत्नी के भुनभुनानेके बाद भी जब अपनी मित्र मण्डली से बात करना बन्द नहीं किये, तो पत्नी ने गन्दा पानी उन पर उड़ेल दिया। सन्तने हँसते हुए कहा कि गरजने के पश्चात् बादल बरसते भी हैं, मित्रमण्डली हक्की-बक्की रह गयी। उन्होंने सन्त की महानताका परिचय पाया। एकनाथ महाराज के गाँव में एक बार शर्त लगी कि जो कोई महाराजको क्रोध दिला देगा, उसे दो सौ रुपये मिलेंगे। दूसरे दिन एक व्यक्ति नाथ के घर जाकर उनकी पत्नी की गोदी में चढ़कर बैठ गये। महाराज पूर्ववत् भजन करते रहे। थोड़ी देर में उनकी पत्नी गिरिजा बाई दीपक में घी डालने को झुकीं कि वह व्यक्ति उछलकर उनकी पीठ पर सवार हो गया। नाथ ने कहा कि देखना, इसको, कहीं गिर न पड़े, चोट न लग जाय। पत्नी ने जवाब दिया कि आप बेफिक्र रहें। मुझे हरि पण्डित (पुत्र)-को इस तरह पीठ पर लादे-लादे कार्य करने।का अभ्यास है, व्यक्ति शर्मिन्दा होकर भाग खड़ा हुआ। कहते हैं कि अक्रोधी मानवों के शरीर से ताजे गुलाब- सी भीनी-भीनी गन्ध निकलती रहती है। राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, ईसा मसीह ऐसे ही महामानव थे। धरा ऐसे सन्त- महापुरुषों को पाकर सनाथ होती है। Visit Sa News YouTube #sant ram pal ji maharaj #me follow
sant ram pal ji maharaj - नग ने मारे पत्थरतुझको বুী @ঔ এভ্া২ (ulono नग ने मारे पत्थरतुझको বুী @ঔ এভ্া২ (ulono - ShareChat