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500 से अधिक गीत दान में मुफ्त में गावो सभी गाने फेसबुक पर लिंक https://www.facebook.com/profile.php?id=100010663113000&mibextid=ZbWKwLप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार जहर व्यापार।। ### मुखड़ा (Hook) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… देश का गद्दार है… --- ### अंतरा 1 कुर्सी पाई जनता से तूने, जनता का ही खून पिया, झूठे वादे, झूठे नारे, सच में सबका हक छीन लिया। माँ–बहनों की चीख दबाकर, अपना राज बचाता है, धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर ज़हर का धंधा चलाता है। **फिर मुखड़ा दोहराओ:** प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है… --- ### अंतरा 2 हर शहर में, हर गाँव में अब रोगों का अँधियारा है, दूषित जल और ज़हरीला अन्न, यही तेरा उपकार है। युवा बेरोज़गार खड़ा है, कर्ज़ में डूबी हर सरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद – और तू कहे “ये विकास” विचार! **छोटा रीफ्रेन:** जो जनता को बीमार करे, वो कैसा सेवक, कैसा सरदार? तेरी नीयत, तेरे कर्मों से खुला तेरा असली व्यवहार। --- ### अंतरा 3 – जनता की आवाज़ अब जनता भी जाग रही है, चेहरा तेरा पहचान रही है, जो कल तक तुझे नेता कहते, आज तुझको गद्दार कह रही है। सदियों तक ये बात लिखी जाएगी, इतिहास तुझसे पूछे सवाल, “जिसे मिला था नेतृत्व भारत का, क्यों बना वो ज़हर का दलाल?” --- ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… और जनता अब तय करेगी, तेरा अगला “फैसला” क्या है, ज़हर के धंधे पर पलने वालों का सत्ता में कोई अधिकार नहीं है। गीत विशंभर गिरि मेटा एआई  प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है।  योगी – गुलाम धन का,  तेरा जीना ही बेकार है।    तूने भारत देश को बीमार किया,  तेरा ज़हर ही व्यापार है।  इंसान नहीं –  तू देश का गद्दार है…  देश का गद्दार है…  --- ### अंतरा 1 कुर्सी पाई जनता से तूने,  जनता का ही खून पिया,  झूठे वादे, झूठे नारे,  सच में सबका हक छीन लिया।  माँ–बहनों की चीख दबाकर,  अपना राज बचाता है,  धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर  ज़हर का धंधा चलाता है।  **फिर मुखड़ा दोहराओ:**  प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है…  ### अंतरा 2 हर शहर में, हर गाँव में अब  रोगों का अँधियारा है,  दूषित जल और ज़हरीला अन्न,  यही तेरा उपकार है।  युवा बेरोज़गार खड़ा है,  कर्ज़ में डूबी हर सरकार,  स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद –  और तू कहे “ये विकास” विचार!  जो जनता को बीमार करे,  वो कैसा सेवक, कैसा सरदार?  तेरी नीयत, तेरे कर्मों से  खुला तेरा असली व्यवहार।  ### अंतरा 3 – जनता की आवाज़ अब जनता भी जाग रही है,  चेहरा तेरा पहचान रही है,  जो कल तक तुझे नेता कहते,  आज तुझको गद्दार कह रही है।  सदियों तक ये बात लिखी जाएगी,  इतिहास तुझसे पूछे सवाल,  “जिसे मिला था नेतृत्व भारत का,  क्यों बना वो ज़हर का दलाल?”  ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है।  योगी – गुलाम धन का,  तेरा जीना ही बेकार है।  तूने भारत देश को बीमार किया,  तेरा ज़हर ही व्यापार है।  इंसान नहीं –  तू देश का गद्दार है…  और जनता अब तय करेगी,  तेरा अगला “फैसला” क्या है,  ज़हर के धंधे पर पलने वालों का  सत्ता में कोई अधिकार नहीं है।  गीत विशंभर गिरि मेटा एआई मुखड़ा न्याय के पद पे बैठा है, हाथ में तौल नहीं इंसाफ़ का  कानून की बातें करता है, सौदा करता है विश्वास का  कुर्सी मिली तो भूल गया, किसके वोट से आया था  रोटी-कपड़ा-ईमान बेच, ज़हर का धंधा चलाया था  सच की आवाज़ दबाता है, झूठ को झंडा कहता है  अपनी जात, धर्म के नाम पे, जनता को टुकड़ों में बँटता है  चौकीदार बनके आया था, ख़ुद ही चोरों से यार हुआ  जनता की साँसों पे लगाकर दाम, ज़हर का कारोबार हुआ    *(मुखड़ा / ये कैसे प्रधानमंत्री हैं, कैसे ये मुख्यमंत्री हैं  मंच पे बोलें सेवा की, अंदर से ये ज़हरीले हैं  सांसद–विधायक सब मिलके, जनता का गला दबाते हैं  न्याय के सिंहासन पर बैठ, अन्याय का गीत सुनाते हैं  चरित्रहीन जो नेता हैं, ज़हरीली उनकी हर सौगात  देश नहीं, केवल कुर्सी प्यारी, सत्ता ही इनकी औकात  ऐसे घटिया लोगों से अब, सवाल हमारा एक ही है  देश को क्या तुम दोगे आगे, जब ज़हर ही तेरी रेख है  *(अन्तरा 2)*  कहते “नया भारत देंगे”, दे दी बेरोज़गारी बस  कागज़ पर सपनों के क़िले, ज़मीं पे टूटी हर आस  आँख में धूल झोंक के बोले, “विकास देखो, विकास देखो”  अंदर-अंदर खा रहे हैं, जनता की हर साँस देखो  किसान यहाँ ज़हर पीता है, नेता सिर्फ़ उदघाटन में  मरते बच्चे, माँ रोती है, वो फोटो खिंचवाएँ दान में  कानून के मंदिर में बैठे, क़ानून को ही बेच दिया  इंसाफ़ की शादी कर डाली, पैसों से रिश्ता सेट किया  *(मुखड़ा)*  ये कैसे प्रधानमंत्री हैं, कैसे ये मुख्यमंत्री हैं । भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है,  भारत देश सर्वाधिक कर्ज़ वाला देश बन रहा है,  भारत देश में कोई भी स्वस्थ नहीं अब रह पाएगा,  आने वाली हर पीढ़ी तक, साँसों में ज़हर ही जाएगा।  भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है,  भारत देश सर्वाधिक कर्ज़ वाला देश बन रहा है,  जल में ज़हर, वायु में ज़हर, धरती भी बीमार हुई,  ऐसे पापों से भरती ये सत्ता कितना और शर्म खोई?  ### अन्तरा 1 – बीमार देश, कर्ज़, जनता कल तक जो था “सोने की चिड़िया”, अब कर्ज़ों का अड्डा है,  हर बच्चा लोन की छाया में, जन्म से ही देनदार खड़ा है।  बीमारियों से टूट चुका तन, दवाइयों पर चलता देश,  सरकारी बिस्तर कम पड़ते हैं, सबके चेहरों पर क्लेश।  राशन, गैस, बिजली, पानी, सब पर बोझा, सब पे भार,  जनता की कमर टूट चुकी है, ऊपर बैठा भ्रष्टाचार।  जो कहते थे “हम सेवक हैं”, अब महलों में रहते हैं,  जनता कतारों में मरती है, ये शानो–शौकत गिनते हैं।  भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है… ### अन्तरा 2 – जल, वायु, ज़हर और आने वाली पीढ़ियाँ नदियों में कारख़ानों का ज़हर, झरनों में बदबू है अब,  तालाबों की मरी मछलियाँ, पूछ रहीं “होगा क्या सब?”  शुद्ध जल था जिस धरती पर, आज वहाँ गंदा सैलाब,  हर घूँट में बीमारी घोली, ये कैसा विकास का ख्वाब?  वायु में धुएँ के बादल हैं, बच्चों की भी साँसें भारी,  खाँसी, दम, एलर्जी–अस्थमा – ये बन गई नई बीमारी।  कहते “आने वाली पीढ़ियों को देंगे नया उजला देश”,  पर सच ये है साँसों तक में, छोड़ रहे ज़हर की रेश।  ### मुखड़ा भारत देश की जनता ने धोखा–धोखा ही पाया,  जिनको समझा था ईमानदार, वही ज़हरीला निकला साया।  कहने को देशभक्त बनते, महात्मा–सा रूप दिखाते,  अंदर से अपराधी, भ्रष्टाचारी, देश के गद्दार कहलाते।  मतदान से जिनको ऊँचा कर दिया,  उन्होंने ही ज़हर परोसा,  आज का वर्तमान बीमार किया,  आने वाला हर कल भी रोया।  भारत देश की जनता जागो,  झूठे नक़ाबों को पहचानो,  जो गद्दार हैं इस मिट्टी के,  उन्हें न एक भी मौका देना।  ### अन्तरा 1 – “ईमानदार” का मुखौटा, गद्दार की हक़ीक़त भारत देश की जनता ने धोखा पाया बार–बार,  किसी ने पहन लिया “ईमानदार” का चेहरा, पर दिल में गद्दार।  टीवी पर भाषण, आँख में आँसू, मंचों पर झूठी नम्रता,  पीछे बैठ के सौदा करते, बेच रहे थे देश की आत्मा।  कहते “हम हैं चौकीदार”, “हम हैं योगी, हम हैं संन्यासी”,  पर फ़ैसलों में दिखता ज़हर, जनता की साँसों पर रखी फांसी।  देशभक्ति का नारा ऊँचा, अंदर सौदा पाकिस्तान से,  माल–ओ–दौलत, सत्ता के बदले, आत्मा बेच दी शैतान से।  जनता ने जिसे सच्चा समझा,  वो देश का गद्दार निकला,  रोटी की जगह ज़हर परोसा,  हर घर बीमार कर निकला।  भारत देश की जनता जागो,  मतदान का मोल समझो,  जिन्होंने आज तुम्हें ज़हर दिया,  कल फिर उनको मत चुनो।  ### अन्तरा 2 – मतदान, धर्म, भ्रष्टाचार जिसे तुमने मतदान देकर, धर्म समझ के ऊँचा किया,  उसने ही अपराध बढ़ाया, न्याय का गला घोंट दिया।  भारत की भोली जनता ने, कैसा ये धोखा खाया,  देशभक्त समझ के गद्दारों को, खुद ही सिंहासन पर बिठाया।  रोटी की जगह ज़हर मिला, तन–मन सारा बीमार हुआ,  अब भी चुप हो तो जान लो, ये खामोशी भी अपराध हुआ।  ### अन्तरा 1 – धोखा, “ईमानदार” का नक़ाब झोली में लेके आशाएँ, जनता मतदान को जाती थी,  सोचती “ये अपना होगा, हमारी पीड़ा क्या–क्या जानता होगा । टीवी के भाषण, आँसू, वादे – “मैं ही तो हूँ रखवाला”,  पर अंदर की उसकी नीयत, थी केवल सत्ता, धन, और ताला।  ईमानदारी की चादर ओढ़े, झूठी सादगी की चाल चली,  “मैं फ़कीर हूँ, मैं योगी हूँ” – ये लाइनें हर रोज़ चली।  मगर फैसले सब ऐसे आए, जनता का ही खून पिएँ,  किस्मत अपनी मान के हमने, बस चुपचाप आहें लिए।  भारत की भोली जनता ने, कैसा ये धोखा खाया…  ### अन्तरा 2 – ज़हर, बीमारी, महामारी कोरोना की काली रातें, भूखे–प्यासे सफ़र पे लोग,  पटरी पर सोते मज़दूरों को, कुचल गई कितनी सींव–रोग।  लाखों बेघर, लाखों विधवा, लाखों घरों में मातम था,  फिर भी सत्ता के महल सजे थे, वहाँ हँसी–ठहाका कम था?  दवा बनी कारोबार यहाँ, ऑक्सीजन भी बिकने लगी,  साह–साह पे बोली लगती, हर साँस बोझिल होने लगी।  आज तक बीमारियाँ हर घर, कल भी ये सिलसिला चले,  ज़हर मिला है जल–वायु में, कैसे भला कोई स्वस्थ रहे?  रोटी की जगह ज़हर मिला, तन–मन सारा बीमार हुआ…  ### अन्तरा 3 –  भ्रष्टाचार, धर्म के नाम पर खेल धर्म–धर्म करके गद्दारों ने, भीड़ तुम्हारी बाँट दी,  मंदिर–मस्जिद, जात–मज़हब में, तुमको ही तुमसे छीन ली।  जब रोटी–रोज़ी–इलाज की बात, मुँह से निकली, दबवा दी,  और चुनाव में नारे बदलकर, नफ़रत की दी दीवार नई।  भ्रष्टाचार की बेलें ऐसी, हर दफ्तर तक पहुँची हैं,  कागज़–कागज़ पर रिश्वत लिखी, फाइलें तक बिक चुकी हैं।  व्हाट्सएप भी हैक किया जाता है। प्राइवेसी किसी को भी नहीं है।।     #🕉 शिव भजन #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱बम बम भोले🙏 #🪔शिवरात्रि व्रत स्पेशल 🙏 #🔱रुद्राभिषेक🙏
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