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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋
❤️अस्सलामु अलैकुम - अय्यामे हैज़ व निफास और रोज़ा হীতা  हैज़ व निफास के दिनों में रखना हराम है, इन रोज़ों की बाद में कज़ा की जाएगी , अलबत्ता इस्तिहाजा यानी बीमारी का खून निकलने की सूरत में न रोज़ा मुआफ़ है, ন নসাড় | নীড়া याद रहे कि निफास यानी बच्चे की पैदाइश के सवा महीने के दौरान अगर औरत का खून बन्द हो जाए, तो रोज़़ा उस पर वाजिब है कि गुस्ल कर के नमाज़ पढ़े और হীতা रखे, और जब ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो नमाज़ व एहतिमाम तर्क कर दे। और अगर सवा महीने यानी का निफास के दिन पूरे होने के बाद भी खून जारी है, तो ये बीमारी का खून है, इन बाद के दिनों में नमाज़ व रोज़ा मुआफ़ नहीं। 1  : . 9৬9 215 ০০ अय्यामे हैज़ व निफास और रोज़ा হীতা  हैज़ व निफास के दिनों में रखना हराम है, इन रोज़ों की बाद में कज़ा की जाएगी , अलबत्ता इस्तिहाजा यानी बीमारी का खून निकलने की सूरत में न रोज़ा मुआफ़ है, ন নসাড় | নীড়া याद रहे कि निफास यानी बच्चे की पैदाइश के सवा महीने के दौरान अगर औरत का खून बन्द हो जाए, तो रोज़़ा उस पर वाजिब है कि गुस्ल कर के नमाज़ पढ़े और হীতা रखे, और जब ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो नमाज़ व एहतिमाम तर्क कर दे। और अगर सवा महीने यानी का निफास के दिन पूरे होने के बाद भी खून जारी है, तो ये बीमारी का खून है, इन बाद के दिनों में नमाज़ व रोज़ा मुआफ़ नहीं। 1  : . 9৬9 215 ০০ - ShareChat