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#दिल से
दिल से - कभी कभी हम उलझन में पड़ जाते है की दिल रहा है हा ये कह करो और मन कह रहा है मत करो। जबकि दिल और मन दोनों एक ही शरीर के हिस्से है। कभी कभी हम उलझन में पड़ जाते है की दिल रहा है हा ये कह करो और मन कह रहा है मत करो। जबकि दिल और मन दोनों एक ही शरीर के हिस्से है। - ShareChat