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#✡️महाशिवरात्र के ज्योतिषीय उपाय 🌟 #🛕महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं🚩 #✡️महाशिवरात्रि मुहूर्त ⏳ #🙏शिव पार्वती #🪔शिवरात्रि व्रत स्पेशल 🙏
✡️महाशिवरात्र के ज्योतिषीय उपाय 🌟 - महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजन मार्गदर्शिका व्रत की शुरुआत सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बादृ संकल्प से होता है। शिवरात्रि का व्रत करने वाला सबसे पहला पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके हो और दाहिने हाथ में जल, अक्षेत , पुष्प और कुछ दक्षिणा पकड़ कर यह संकल्प करेः- संकल्पः समस्त पापकक्षय पूर्वकं. स-परिवारस्य "মম आयु-आरोग्य ऐश्वर्य प्राप्त्यर्थ, भगवान शिव॰प्रीत्यर्थं च महाशिवरात्रि व्रतं अहं करिष्ये।" கிஸர शिवरात्रि में 'निशीथ काल' (अर्धरात्रि) सबसे मुख्य है, கிஸ लेकिन शास्त्रों में चार प्रहर  का विशेष विधान हैः पूजन के चार प्रहर (Pooja Timing प्रथम प्रहर शाम ६:०० से 9:०० अभिषेक = द्वितीय प्रहर रात 9:०० से १२:०० दही से अभिषेक प्रहर रात १२:०० से ३ः०० घी से अभिषेक எளq चतुर्थ प्रहर सुबह ३:०० से ६:०० शहद से अभिषेक! साल २०२६ में महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा का सबसे 5 १५ फरवरी २०२६ की देर रात (१६ फरवेरी की १२:०9 बजे से लेकर १:०१ बजे तक रहेगा | मुख्य भोगः पंचामृत, मखाने की खीर, या दूध से बनी मिठाई। बेल का फल, बेर, केला और संतरा| फलः सावधानीः शिव जी पर तुलसी दल, हल्दी , सिंदूर या केतकी का फूल कभी न चढ़ाएं। दिन सूर्योदय के बाद और चतुर्दशी पारणः व्रत का पारण अगले तिथि के भीतर ही करना चाहिए। पं. शिवम कुमार महाशिवरात्रि व्रत एवं पूजन मार्गदर्शिका व्रत की शुरुआत सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बादृ संकल्प से होता है। शिवरात्रि का व्रत करने वाला सबसे पहला पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके हो और दाहिने हाथ में जल, अक्षेत , पुष्प और कुछ दक्षिणा पकड़ कर यह संकल्प करेः- संकल्पः समस्त पापकक्षय पूर्वकं. स-परिवारस्य "মম आयु-आरोग्य ऐश्वर्य प्राप्त्यर्थ, भगवान शिव॰प्रीत्यर्थं च महाशिवरात्रि व्रतं अहं करिष्ये।" கிஸர शिवरात्रि में 'निशीथ काल' (अर्धरात्रि) सबसे मुख्य है, கிஸ लेकिन शास्त्रों में चार प्रहर  का विशेष विधान हैः पूजन के चार प्रहर (Pooja Timing प्रथम प्रहर शाम ६:०० से 9:०० अभिषेक = द्वितीय प्रहर रात 9:०० से १२:०० दही से अभिषेक प्रहर रात १२:०० से ३ः०० घी से अभिषेक எளq चतुर्थ प्रहर सुबह ३:०० से ६:०० शहद से अभिषेक! साल २०२६ में महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा का सबसे 5 १५ फरवरी २०२६ की देर रात (१६ फरवेरी की १२:०9 बजे से लेकर १:०१ बजे तक रहेगा | मुख्य भोगः पंचामृत, मखाने की खीर, या दूध से बनी मिठाई। बेल का फल, बेर, केला और संतरा| फलः सावधानीः शिव जी पर तुलसी दल, हल्दी , सिंदूर या केतकी का फूल कभी न चढ़ाएं। दिन सूर्योदय के बाद और चतुर्दशी पारणः व्रत का पारण अगले तिथि के भीतर ही करना चाहिए। पं. शिवम कुमार - ShareChat