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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून #📝कविता / शायरी/ चारोळी #📝हृदयस्पर्शी मराठी कविता✍🏻 #✍🏻प्रसिद्ध कवींच्या कविता📝 #💘एकतर्फी प्रेमावर कविता
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - औरत स्वरचित काव्य एक डगर हम़ भी चले थे सुकून के राह पे पता ही नहीं चला कब उमर ढल गई रात के सफ़र में. और उजाला कहीं दिखा ही नहीं खाली सड़क दिखती गई बस अपनों के तलाश में. मंजिल करीब आती नज़र आईपर एक खोकला भ्रमं निकलता गया और हम ..हम़ बन के रह गये. एक चाहत के डगर पर अपना ही हाथ थांमे अपनों के साथ नज़र आने के लिए॰॰ हम़ बडा़ दिल लिए॰ भी दिल सें दिल जोड़े चल रहे हैं आज अपनों का साथ लिए यहीं तो हैं जिंदगी औरत की अपने रिश्ते संभाले चले खुबसूरत डगर पर हंसते हंसते.... ! कवियत्री - प्रा.सौं .शितल अशोक कंबानी औरत स्वरचित काव्य एक डगर हम़ भी चले थे सुकून के राह पे पता ही नहीं चला कब उमर ढल गई रात के सफ़र में. और उजाला कहीं दिखा ही नहीं खाली सड़क दिखती गई बस अपनों के तलाश में. मंजिल करीब आती नज़र आईपर एक खोकला भ्रमं निकलता गया और हम ..हम़ बन के रह गये. एक चाहत के डगर पर अपना ही हाथ थांमे अपनों के साथ नज़र आने के लिए॰॰ हम़ बडा़ दिल लिए॰ भी दिल सें दिल जोड़े चल रहे हैं आज अपनों का साथ लिए यहीं तो हैं जिंदगी औरत की अपने रिश्ते संभाले चले खुबसूरत डगर पर हंसते हंसते.... ! कवियत्री - प्रा.सौं .शितल अशोक कंबानी - ShareChat