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Anurag dwara rachit kavita ❤️ #👌 अच्छी सोच👍 #📜 Whatsapp स्टेटस #📖 कविता और कोट्स✒️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🤘My Status😎
👌 अच्छी सोच👍 - शीर्षक - गुम है मैं अपने में ही  खो रहा ` ٤ जागते हुए ` भी सो रहा हूं कर्तव्य के पथ से डगमगा कर शीशे की तरह चकना चूर हो रहा हूं ना जाने कब, कहां, कैसे खो गया हूं दूर हो गया हूं से बहुत  मैं अपनों साजिशों के घेरे में फस रहा हूं मैं के माहौल में भी हंस रहा हूं मैं IIH एक सहारा बस इतना चाहिए को किनारा जितना चाहिए डूबते सोचते सोचते खो जाता हूं मैं स्वयं से ही दूर हो जाता हूं मैं अपने में ही खो रहा हूं क्योंकि जागते हुए भी सो रहा हूं। 9H.... (अनुराग) शीर्षक - गुम है मैं अपने में ही  खो रहा ` ٤ जागते हुए ` भी सो रहा हूं कर्तव्य के पथ से डगमगा कर शीशे की तरह चकना चूर हो रहा हूं ना जाने कब, कहां, कैसे खो गया हूं दूर हो गया हूं से बहुत  मैं अपनों साजिशों के घेरे में फस रहा हूं मैं के माहौल में भी हंस रहा हूं मैं IIH एक सहारा बस इतना चाहिए को किनारा जितना चाहिए डूबते सोचते सोचते खो जाता हूं मैं स्वयं से ही दूर हो जाता हूं मैं अपने में ही खो रहा हूं क्योंकि जागते हुए भी सो रहा हूं। 9H.... (अनुराग) - ShareChat