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#✍गुलजारांचे साहित्य #🖋शेरो-शायरी
✍गुलजारांचे साहित्य - कलेंडर हमेशा तारीख़ को बदलता है पर एक दिन ऐसी तारीख भी आती है जो कलेंडर को ही बदल देती है इसलिए सब्र रखें वक़्त हर किसी का आता है गुलज़ार कलेंडर हमेशा तारीख़ को बदलता है पर एक दिन ऐसी तारीख भी आती है जो कलेंडर को ही बदल देती है इसलिए सब्र रखें वक़्त हर किसी का आता है गुलज़ार - ShareChat