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#संत श्री आशारामजी बापू ##भक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #📿संतवाणी 🗣️ #🙏🏻🌸आध्यात्मिक बाते😇
संत श्री आशारामजी बापू - Li C`) 31 লী ध्यान मैं तुम्हारे साथ ज्यादा दिन रहूं या तुम मेरे साथ ज्यादा रहो संभव नहीं। इसलिए मैं जो देना चाहता इन फूल हार प्रसाद की मुझे जरूरत नहीं। हूं वो लो। प्रीति... भगवद् ध्यानु में लगाओ। ज्यादा से ज्यादा समय भगवद #5ூ` एकाग्रता के साथ विकारों से भी बचो। विकारों  सुख नहीं मिलता है... संसार में कोई आपको रिझाएगा तो स्वार्थ के लिए। एक संत ने अपनी देह त्याग का स्वांग रचाया था.. शिष्यों को ये सबक देने के लिए कि कभी भी सानिध्य खो सकते हैं... तो कितना पाया तब तक। मैं भी ऐसा करूंगा... समाधि नहीं लगाऊंगा पर. मैं करूंगा भी नहीं। पता चल गया तो अब 3a पर अब २ अप्रैल २०२६ Li C`) 31 লী ध्यान मैं तुम्हारे साथ ज्यादा दिन रहूं या तुम मेरे साथ ज्यादा रहो संभव नहीं। इसलिए मैं जो देना चाहता इन फूल हार प्रसाद की मुझे जरूरत नहीं। हूं वो लो। प्रीति... भगवद् ध्यानु में लगाओ। ज्यादा से ज्यादा समय भगवद #5ூ` एकाग्रता के साथ विकारों से भी बचो। विकारों  सुख नहीं मिलता है... संसार में कोई आपको रिझाएगा तो स्वार्थ के लिए। एक संत ने अपनी देह त्याग का स्वांग रचाया था.. शिष्यों को ये सबक देने के लिए कि कभी भी सानिध्य खो सकते हैं... तो कितना पाया तब तक। मैं भी ऐसा करूंगा... समाधि नहीं लगाऊंगा पर. मैं करूंगा भी नहीं। पता चल गया तो अब 3a पर अब २ अप्रैल २०२६ - ShareChat