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#📖Whatsapp शायरी
📖Whatsapp शायरी - जब लगा था "तीर" तब इतना द्द न हुआ "गालिब" जख्म का एहसास तब हुआ जब "कमान" देखी अपनों के কাথী ম जब लगा था "तीर" तब इतना द्द न हुआ "गालिब" जख्म का एहसास तब हुआ जब "कमान" देखी अपनों के কাথী ম - ShareChat