ShareChat
click to see wallet page
search
#भागवत पुराण #🙏भक्ती सुविचार📝 #👍लाईफ कोट्स #☺️उच्च विचार #😇भक्ती स्टेट्स
भागवत पुराण - Sparedhat ष्स् तिनाघर्मा 3ڈ आत्मा और ओ३म् का रहस्य পসে নিষ্কর্ণ  द्वैत केवल प्रतीति है, 0 तुरीय (वाल्तविक आत्मा ) अमात्र (Sllence) = अद्वैेत ही परमार्थ है।  ओ३प के वाद की शाति ही ग्ह चोथा पद ह जहॉ कोई यह संसार ओर डतके चेद केतल द्वत नही, यही परम साय हे। কচে Tাস মোণা] ৪; মামত ৭ 99 फेचल एक ही सत्य हे। ज्ञान ही मुक्ति है।  जव साधक इस सत्य को जान লনা ৮ নী বচ মসব সর্বী 3117  मुक हो जाता ह दुःखोसे॰ ओ३म के साथ आत्मा एकता 3 '3ী3ম' ৪ী সাল্সা টI ঢ आव्य के और अदातरो शअकी चचार मानाओं  म' = प्रान्न (सुपुग्ति अवस्था ) अ क्चोकि 'ममे समी ध्वानियाँ  विप्तीम हो जाती ह, जेये सपुन्ति  मे सव कुछ्ठ एक हो जाता हे  'স' = ঠথানয ३ = तैजस (स्व्प्न अवस्था ) (जाग्रत अवस्था) বদীঠি 3', 'স' # ওকৃণ্ (9818, क्योकि " अ' सभी धशियो जसे स्वप जाग्रत से सूद्म ओर श्रेष्ठ हे।  কাসাংম্ে & সাসায়ন सभी अनुभवों का आरव्य है।  সায়্ন (Waking)  ঐধ্ানয, नाम সনুসব: মথুল तुरीय নিবতো: বননা বামা কী ओर होती हे ओर वाहरी सगत  4 सुपुप्ति (The Fourth) का अनुभव करती हे।  (Dreaming) (Deep Sleep) TI: IOI नामः तेजन  } ্মামব:  अनुभवः अहेत  সনুসব: কাণে; स४्म নাস: সাহ विवरणः यह तीन चितरणः चेतना यनीभूत  विवरणः चेतना कीओर होती हेओर गन की वागनाओं সনথাসা কা মায়ী থ্ান . हे जहों केवन आनंद  பரி का अनुभव करती हे।  परम कल्चाणकारी ओर का अनुभव होता हे, कोई ारतविक स्वरून है। हंद्घ नही।  परम निष्कर्ष  आत्मा एक है, पर उसके अनुभव के चार स्तर हैं।  ये अवस्थाए बताती ऐ कि हम स्थूल जगत से लेकर परम सत्य तक का अनुभव केसे करते हे। NotebookLM Sparedhat ष्स् तिनाघर्मा 3ڈ आत्मा और ओ३म् का रहस्य পসে নিষ্কর্ণ  द्वैत केवल प्रतीति है, 0 तुरीय (वाल्तविक आत्मा ) अमात्र (Sllence) = अद्वैेत ही परमार्थ है।  ओ३प के वाद की शाति ही ग्ह चोथा पद ह जहॉ कोई यह संसार ओर डतके चेद केतल द्वत नही, यही परम साय हे। কচে Tাস মোণা] ৪; মামত ৭ 99 फेचल एक ही सत्य हे। ज्ञान ही मुक्ति है।  जव साधक इस सत्य को जान লনা ৮ নী বচ মসব সর্বী 3117  मुक हो जाता ह दुःखोसे॰ ओ३म के साथ आत्मा एकता 3 '3ী3ম' ৪ী সাল্সা টI ঢ आव्य के और अदातरो शअकी चचार मानाओं  म' = प्रान्न (सुपुग्ति अवस्था ) अ क्चोकि 'ममे समी ध्वानियाँ  विप्तीम हो जाती ह, जेये सपुन्ति  मे सव कुछ्ठ एक हो जाता हे  'স' = ঠথানয ३ = तैजस (स्व्प्न अवस्था ) (जाग्रत अवस्था) বদীঠি 3', 'স' # ওকৃণ্ (9818, क्योकि " अ' सभी धशियो जसे स्वप जाग्रत से सूद्म ओर श्रेष्ठ हे।  কাসাংম্ে & সাসায়ন सभी अनुभवों का आरव्य है।  সায়্ন (Waking)  ঐধ্ানয, नाम সনুসব: মথুল तुरीय নিবতো: বননা বামা কী ओर होती हे ओर वाहरी सगत  4 सुपुप्ति (The Fourth) का अनुभव करती हे।  (Dreaming) (Deep Sleep) TI: IOI नामः तेजन  } ্মামব:  अनुभवः अहेत  সনুসব: কাণে; स४्म নাস: সাহ विवरणः यह तीन चितरणः चेतना यनीभूत  विवरणः चेतना कीओर होती हेओर गन की वागनाओं সনথাসা কা মায়ী থ্ান . हे जहों केवन आनंद  பரி का अनुभव करती हे।  परम कल्चाणकारी ओर का अनुभव होता हे, कोई ारतविक स्वरून है। हंद्घ नही।  परम निष्कर्ष  आत्मा एक है, पर उसके अनुभव के चार स्तर हैं।  ये अवस्थाए बताती ऐ कि हम स्थूल जगत से लेकर परम सत्य तक का अनुभव केसे करते हे। NotebookLM - ShareChat