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#जगत गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #💓 मोहब्बत दिल से #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
जगत गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज - कबीर परमेश्वर के वचन( पाँच हजार अरू पाँच सौ पाँच जब कलयुग बीत जाय महापुरूष फरमान तब, जग तारन कू आय |66 క్ हिन्दु तुर्क आदि सबै, जेते जीव जहान सत्य नाम की साख गही, पावैं पद निर्वान |67 सिन्धु यथा सरितगण आप ही॰ मिलैं স ঘায सत्य सुकृत के मध्य तिमि॰ सब ही पंथ समाय | l६८ ೬ लग पूर्ण होय नहीं, ठीक का तिथि बार जब कपट -चातुरी तबहि लौं, स्वसम बेद निरधार |69 सबही नारी-नर शुद्ध तब, जब ठीक का दिन आवंत चातुरी छोड़ि के, शरण कबीर गहंत |70 कपट 4 एक अनेक है गए पुनः अनेक हों एक हंस चलै सतलोक सब, सत्यनाम की टेक | I७१ 108 @ घर घर बोध विचार हो, # दूर बहाय | [ कलयुग में सब एक होई॰ बरतें सहज सुभाय |72 कहाँ उग्र कहाँ शुद्र हो, हरै सबकी भव पीर(पीड़) |73 सो समान समदृष्टि है, समर्थ सत्य कबीर |74 38 कबीर परमेश्वर के वचन( पाँच हजार अरू पाँच सौ पाँच जब कलयुग बीत जाय महापुरूष फरमान तब, जग तारन कू आय |66 క్ हिन्दु तुर्क आदि सबै, जेते जीव जहान सत्य नाम की साख गही, पावैं पद निर्वान |67 सिन्धु यथा सरितगण आप ही॰ मिलैं স ঘায सत्य सुकृत के मध्य तिमि॰ सब ही पंथ समाय | l६८ ೬ लग पूर्ण होय नहीं, ठीक का तिथि बार जब कपट -चातुरी तबहि लौं, स्वसम बेद निरधार |69 सबही नारी-नर शुद्ध तब, जब ठीक का दिन आवंत चातुरी छोड़ि के, शरण कबीर गहंत |70 कपट 4 एक अनेक है गए पुनः अनेक हों एक हंस चलै सतलोक सब, सत्यनाम की टेक | I७१ 108 @ घर घर बोध विचार हो, # दूर बहाय | [ कलयुग में सब एक होई॰ बरतें सहज सुभाय |72 कहाँ उग्र कहाँ शुद्र हो, हरै सबकी भव पीर(पीड़) |73 सो समान समदृष्टि है, समर्थ सत्य कबीर |74 38 - ShareChat