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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - *ज़ुबाँ छिलती गई और होंठ मुस्कुराते रहे, झूठ नहीं बोला कभी बस सच छिपाते रहे।* *ज़ुबाँ छिलती गई और होंठ मुस्कुराते रहे, झूठ नहीं बोला कभी बस सच छिपाते रहे।* - ShareChat