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📓 हिंदी साहित्य - 8 कलयुगी सैहिबः उसकी क्दर साहब; नहीं होती; जो 0 0 सच में रिश्तों की कदर करता हैः कदर उसकी होती है; जो सबसे ज्यादा दिखावा करता है. 8 कलयुगी सैहिबः उसकी क्दर साहब; नहीं होती; जो 0 0 सच में रिश्तों की कदर करता हैः कदर उसकी होती है; जो सबसे ज्यादा दिखावा करता है. - ShareChat