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#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - केवल भोलेपन से जीवन नहीं जीया जा रखनी होंगी, विवेक सकता। आँखें பளி जागृत रखना होगा। क्योंकि विपत्ति, छल, अज्ञान और असावधानी में बुद्धि और विवेक शत्रु छिपे होते हैं। यही छिपे हुए शत्रु भीतर چ जीवन में कई विपत्तियाँ लाते हैं। जब मन लगता है, तभी शिव चेतना दिखाई देती डूबने है। जीवन संघर्षों से भरा है। संकट में ईश्वर और आत्मचिंतन सहारा बनते हैं। केवल धैर्य, विवेक और चेतना से ही इन्हें पार किया जा सकता है। केवल भोलेपन से जीवन नहीं जीया जा रखनी होंगी, विवेक सकता। आँखें பளி जागृत रखना होगा। क्योंकि विपत्ति, छल, अज्ञान और असावधानी में बुद्धि और विवेक शत्रु छिपे होते हैं। यही छिपे हुए शत्रु भीतर چ जीवन में कई विपत्तियाँ लाते हैं। जब मन लगता है, तभी शिव चेतना दिखाई देती डूबने है। जीवन संघर्षों से भरा है। संकट में ईश्वर और आत्मचिंतन सहारा बनते हैं। केवल धैर्य, विवेक और चेतना से ही इन्हें पार किया जा सकता है। - ShareChat