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#jai shri ram
jai shri ram - जय श्री राम जिय हनुमान U मीन रजंह नीर अगाधा| सुखी जिमि हरि सरन न एकहु बाधा। ] जैसे अगाध ( अथाह) जल में मछली ( अत्यन्त) सुख पूर्वक रहती है {कम जल होने पर कम सुखी और जल न होने पर मर जाती है। (वैसे ही प्राणी मात्र के) ईश्वर का शरण ( आश्रय) लेने परकोई बाधा ( कष्ट) नही रहता | {मृत्यु का भी भय नही रहता है। सर्वविथ आनन्द ही आनन्द रहता हैI} जय श्री राम जिय हनुमान U मीन रजंह नीर अगाधा| सुखी जिमि हरि सरन न एकहु बाधा। ] जैसे अगाध ( अथाह) जल में मछली ( अत्यन्त) सुख पूर्वक रहती है {कम जल होने पर कम सुखी और जल न होने पर मर जाती है। (वैसे ही प्राणी मात्र के) ईश्वर का शरण ( आश्रय) लेने परकोई बाधा ( कष्ट) नही रहता | {मृत्यु का भी भय नही रहता है। सर्वविथ आनन्द ही आनन्द रहता हैI} - ShareChat