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सबके लिए अच्छा न करे,, #✍️ साहित्य एवं शायरी #😇 चाणक्य नीति #💞Heart touching शायरी✍️ #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #🙏 प्रेरणादायक विचार 😊
✍️ साहित्य एवं शायरी - शेर और मुसाफिर की कहानी तू मुझे आवाज दे 3 रहा था। रास्ते में उसे एक शेर दिखाई जंगल সুমাক্ি एक दिया जो रस्सियों से जकड़ा हुआ था। मुसाफिर को देखकर शेर बोला मेरी मदद करो। मुझे इन रस्सियों से आजाद कर दो। ' मुसाफिर बोला खोलते ही तू मुझे खा जाएगा। ' ' शेर बोला `  मेरा নিল্কল यकीन करो। मै ऐसा भी नहीं करूंगा। ' मुसाफिर को दया आ गई। उसने शेर की रस्सियां खोल दी। दो दिन से भूखा हूं। मुझे भोजन चाहिए।  आजाद होते ही शेर बोला और इस समय तू मेरा आसान शिकार है इसलिए मैं तुझे ख़ाऊंगा। ' मुसाफिर ने जान की भीख मांगी मगर शेर बोला थ्ये मेरी फितरत है वहां से एक  साधु गुजर रहा था। उसने आकर पूछा 'क्या बात है। ' ैने इस " शेर की सहायता की है इसने वादा किया बोला मुसाफिर था मुझे नहीं खायेगा। मगर ये तो अहसान फरामोश निकला।।५  ्ये शेर है। इसकी फितरत ही खाने की है मगर मैं साधु बोला " देखना चाहता हूं तुमने इसकी सहायता कैसे की। एक बार मुझे वो दिखाओ जो तुम दोनों के बीच हुआ। ' मुसाफिर ने फिर से शेर को रस्सियों से बांध दिया। मगर जब रस्मियां वापस खोलने लगा तो साधु बोला ररस्सी मत खोलो। इसे ऐसे ही पड़ रहने दो। ये इसी के लायक है। ' मोरल : नेकियां हर जगह नहीं की जाती और जो आजाद होकर काटने लगे। उसे बांधा हुआ रखना ही अच्छा है। इसलिए नेकिया कीजिए मगर देख कर कीजिए। कहीं ऐसा ना हो वह तुम्हें काट ले। शेर और मुसाफिर की कहानी तू मुझे आवाज दे 3 रहा था। रास्ते में उसे एक शेर दिखाई जंगल সুমাক্ি एक दिया जो रस्सियों से जकड़ा हुआ था। मुसाफिर को देखकर शेर बोला मेरी मदद करो। मुझे इन रस्सियों से आजाद कर दो। ' मुसाफिर बोला खोलते ही तू मुझे खा जाएगा। ' ' शेर बोला `  मेरा নিল্কল यकीन करो। मै ऐसा भी नहीं करूंगा। ' मुसाफिर को दया आ गई। उसने शेर की रस्सियां खोल दी। दो दिन से भूखा हूं। मुझे भोजन चाहिए।  आजाद होते ही शेर बोला और इस समय तू मेरा आसान शिकार है इसलिए मैं तुझे ख़ाऊंगा। ' मुसाफिर ने जान की भीख मांगी मगर शेर बोला थ्ये मेरी फितरत है वहां से एक  साधु गुजर रहा था। उसने आकर पूछा 'क्या बात है। ' ैने इस " शेर की सहायता की है इसने वादा किया बोला मुसाफिर था मुझे नहीं खायेगा। मगर ये तो अहसान फरामोश निकला।।५  ्ये शेर है। इसकी फितरत ही खाने की है मगर मैं साधु बोला " देखना चाहता हूं तुमने इसकी सहायता कैसे की। एक बार मुझे वो दिखाओ जो तुम दोनों के बीच हुआ। ' मुसाफिर ने फिर से शेर को रस्सियों से बांध दिया। मगर जब रस्मियां वापस खोलने लगा तो साधु बोला ररस्सी मत खोलो। इसे ऐसे ही पड़ रहने दो। ये इसी के लायक है। ' मोरल : नेकियां हर जगह नहीं की जाती और जो आजाद होकर काटने लगे। उसे बांधा हुआ रखना ही अच्छा है। इसलिए नेकिया कीजिए मगर देख कर कीजिए। कहीं ऐसा ना हो वह तुम्हें काट ले। - ShareChat