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मंत्र - कई साधक इस साधना को केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि कुल, घर और पीढ़ियों की उन्नति के लिए करते हैं। कहा जाता है कि जहां अघोर गजलक्ष्मी का आवाहन होता है, और शत्रुता टिक नहीं पाती। धन q6T negativity g?Tu आता है, अवसर आता है, पर उससे भी अधिक शक्ति आती है। इस अनुष्ठान का मूल मंत्र है ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं गजलक्ष्म्यै भैरवी नमः जप संख्या १०८ रात्रि में, दीप और मौन के साथ। जिस व्यक्ति को धन तो मिलता है, पर टिकता नहीं, जिसे अवसर मिलते हैं, पर लाभ नहीं, जिसके जीवन में भाग्य टूटता रहता है, और जो जीवन में सत्ता, प्रभाव और उन्नति चाहता है, उसके लिए यह साधना अमृत है। अघोर कहता है कि समृद्धि आपका अधिकार है, दान नहीं। और यह अनुष्ठान आपके भीतर अधिकार की चेतना जगाने के लिए है। कई साधक इस साधना को केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि कुल, घर और पीढ़ियों की उन्नति के लिए करते हैं। कहा जाता है कि जहां अघोर गजलक्ष्मी का आवाहन होता है, और शत्रुता टिक नहीं पाती। धन q6T negativity g?Tu आता है, अवसर आता है, पर उससे भी अधिक शक्ति आती है। इस अनुष्ठान का मूल मंत्र है ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं गजलक्ष्म्यै भैरवी नमः जप संख्या १०८ रात्रि में, दीप और मौन के साथ। जिस व्यक्ति को धन तो मिलता है, पर टिकता नहीं, जिसे अवसर मिलते हैं, पर लाभ नहीं, जिसके जीवन में भाग्य टूटता रहता है, और जो जीवन में सत्ता, प्रभाव और उन्नति चाहता है, उसके लिए यह साधना अमृत है। अघोर कहता है कि समृद्धि आपका अधिकार है, दान नहीं। और यह अनुष्ठान आपके भीतर अधिकार की चेतना जगाने के लिए है। - ShareChat